जीवन रैन बसेरा | jivan rain basera | Life shelter


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यह कविता एक गीत के रुप में है, इसमें जीवन के ऊपर अपने मधुर विचारों को संजोया गया है। हमें अपने जीवन को एक मधुर अनुभव की तरह जीना चाहिए।

 जीवन 

जीवन रैन बसेरा रे भाई, जीवन रैन बसेरा रे भाई। ।

मैं ढाल-दाल ढहरा रे भाई, हर पात का रहता फहरा ।

हर पात का रहता मुझ पर पहरा ।।

जीवन रैल गाड़ी रे भाई, जीवन रैल गाड़ी ।।

मैं चलता ढोता वजन पहिया, हर भाग का रहता सहरा ।

हर भार को ढोता रहता सहता ।।

जीवन भौर-सवेरा रे भाई, जीवन भौर-सवेरा ।

मैं पंछी खुले गगन का रे भाई, हर खैत पर हूँ ढहरा।

हर खैत पर करता पहरा ।।

जीवन दिन-दुपहर रे भाई, जीवन-दुपहर  ।।

मैं शाम चल चलता रे भाई, हर घड़ी का रहता पहरा ।

हर क्षण का रहता पहरा ।।

जीवन एक दौड़ रे भाई, जीवन एक दौड़  ।।

जीवन हर धारा को पार करता, हर पग का कट रहा ।

हर पग को गिन रहा ।।

जीवन है सघंर्ष रे भाई, हर पल को बढ़ रहा ।

हर पल का हिसाब रख रहा ।।

जीवन अस्थिर रे भाई, जीवन है अस्थिर ।

मैं अपने कर्म पर ठहरा रे भाई, हर जन को कह रहा ।

हर जन को कर्म की कह रहा ।।


Kavitarani1 

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