कुछ तो | kuchh to



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कुछ तो...


सब ठीक चल रहा होता है,

कुछ जमने वाला होता है,

आगे बढ़ने को होंसला आता है, 

शांत मन सपने पूरे करने को जाता है, 

सुकून की तलाश होती है, 

सब कुछ बदलने वाला है लगता है;

कि सब धरा रह जाता है।

सब पड़ा रह जाता है, 

सब बिगड़ जाता है, 

सब छुट जाता है ।

आखिर क्यों हुआ ये ?

क्या कमी रही गई ?

क्या बात हो गई ?

कुछ तो बात है, 

फिर लगता है, 

कुछ तो बात है ।।


Kavitarani1 

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