अकेला मैं / Main akela


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अकेला मैं 


कैसे बताऊँ कितना अकेला हूँ, 

अपने मन से पूरा तन्हा हूँ, 

कायर हूँ, डरपोक हूँ, 

मैं अजन्मा शौक हूँ ।


हिम्मत नहीं,

 चुनौतियों से कैसे लडू,

प्यासा हूँ,

 सुखे को कैसे तरू,

थका हूँ,

चट्टानो को पार कैसे करूँ, 

भटका हूँ,

वनों को कैसे पार करूँ ।


नम हूँ खुदी के गमों से, 

देख रहा हूँ सुनी आँखो से, 

सुखे होठों से मुस्कुराता हूँ, 

मैं तन्हा गुजर जाता हूँ ।


जो कांटे थे पैरों के, 

पीछे लगे है पूँछ बनके,

आगे ज्यों बढ़ता हूँ,

उनको देख पिछे गिरता हूँ ।


हूँ डर के साये में, 

हूँ अँधेरे के पाये में, 

हूँ अकेला पथ पर मैं,

मन से भी बस तन्हा मैं, 

कैसे बताऊँ कितना अकेला मैं ।।


Kavitarani1 

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