मुझे खुलकर मुस्कुराना है | mujhe khulkar muskurana hai

 


मुझे खुलकर मुस्कुराना है 


किसी के दबाव से ऊपर उठकर।

आजाद जिन्दगी को पाना है ।

छोटी-मोटी खिटपिट से दूर रहकर।

सपनों को पूरा करना है। 

ज्यादा कुछ मांगा नहीं अभी तक।

बस मुझे खुलकर मुस्कुराना है। ।


वो दबी सी हँसी मुझे नहीं भाती ।

चिढ़चिढाहट भरी जिंदगी रास नहीं आती ।

लोगों की परवाह।कर काम करना नहीं आता ।

मुझे घूट-घूटकर जीना नहीं आता ।

अपनी धुन में काम करना है ।

मुझे खुलकर मुस्कुराना है। 


जब सपनों का जहान होगा ।

कोई अपना बस अपना साथ होगा।

उन्ही से जिन्दगींको मंजिल पर ले जाना है। 

सारी बाधाओं को हिम्मत से पार करना है। 

ज्यादा कुछ मांगा नहीं अभी तक ।

बस मुझे खुलकर मुस्कुराना है। ।


इस स्वार्थी जग को भूल जाना है। 

अपने चाहने वालों को गले लगाना है। 

आशाओं के बादलों पर सच का परचम लहराना है।

सपनों को हकीकत कर जाना है। 

बस एक ही जिन्दगी है मेरे पास तो ।

इसमें मुझे खुलकर मुस्कुराना है ।।


Kavitarani1 

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