अधुरा / Adhura



 अधुरा


अधुरा था मैं अधुरा ही रहा।

पाकर एक आसमां को धुल बना।

ना जमीन से अंकुरित हुआ।

ना सार जीवन का बना।।

जमीन में दफ्न आधा नम पङा हुआ।

खिलने को अभी भी जमीन में पङा हुआ।

कब वो बरसात होगी।

रहमत खुदा की प्यास होगी।

जाने कब बनेगा तराना मेरा।

जाने कब प्यार की बात होगी।

सुकुन उर आराम होगा।

मन का मन से साथ होगा।

जो देखुँगा मुस्कान संग ही।

जहाँ चाहुँगा मन उमंग ही।

अहसास प्यार का हर तंरग में होगा।

जब दिल होगा मौज का आसमां होगा।

अधुरा था मैं अधुरा रहा।

कहा क्या, क्या रह गया।

पहले से शुरु हुआ।

पहले पे ही खत्म हुआ।

अधुरा था मैं, अधुरा ही रहा।

खुद को खोजता हूँ मैं कहाँ होगा।

अधुरा था, अधुरा ही रहा।।


-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

तुम याद आते हो। (tum yad ate ho )