मन मेरा माने ना / man mera mane na



 मन मेरा माने ना


रुठा नहीं किसी से अब।

याद नहीं आती है।

अकेले में फिर क्यों आँख भर आती है।

कैसे कहुँ हाल कोई जाने ना।

मेरा मन अकेला माने ना।।


ख्वाहिशें हो अधुरी तो पुरा करने जाऊँ।

मन से रोऊँ और मुस्कुराऊँ।

हालात दिल के कोई जाने ना।

मेरा मन अकेला माने ना।।


कहता फिरे जग को की कौन अपना है।

भरे दिल से मिलते सब सपना है।

दिल को भाये वो अपना माने ना।

मेरा मन अकेला माने ना।।


लगता है हवाएँ खिलाफ है मेरे।

भाग में पल भर की खुशियाँ है मेरे।

कोई अपना दिल से खुशियाँ जाने ना।

मेरा मन अकेला माने ना।।


खुब कहा है कहने वाले एकान्त ने।

जी लो ऊपर से, अंदर ना जाना किसी के।

तुम बुरे जग ओर बुरा कौन किसी की माने है।

मेरा मन अकेला माने ना।

हाल अपना माने ना।

मेरा अकेला माने ना।।


कवितारानी।

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