नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile



नव वर्ष- उमंग मिले


सतरंग मिले, इन्द्र धनुष खिले।

चहुँ ओर नव उमंग मिले।

जाओ जहाँ खुशहाली हो।

महके फिजाएँ जैसे बंसत हो।।


बरखा संग हरियाली हो।

सब ओर महकती होली हो।

दुर मावस सा घोर अँधेरा हो।

नव निशा जैसे रोज दीवाली हो।।


खिली धुप तपन शीत हो,

शुष्क, ग्रीष्म, शरद ऋत हो।

स्वच्छ निर्मल बहती दरिया हो।

शांत नयन मखमल ह्रदय हो।।


स्वर गुंजन रस कोयल हो।

मधुर मिठास रसना प्रौढ़ हो।

शांत चित्त, कोमल लिहाफ हो।

महकते उपवन में मधुमास योवन हो।।


आभा यश किर्ति बखान गाती हो।

सर्व सिध्दि, नव निधि प्राप्ति हो।

जाओ जहाँ स्वकेन्द्र जग हो।

प्रकाश मान बन समाज को रोशनी हो।।


हर दिन खिले, नव माला बुने।

सुन्दर लुभायमान जीवन बनों।

नववर्ष पर कामना करें।

आपका नववर्ष उज्जवल हो।।


-कवितारानी।

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