संदेश

अँधेरे कोने लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अँधेरे कोने / Andhere kone

चित्र
अँधेरे कोने इन अँधेरे कोने से किसे मिलाऊँ। बहती अँधियों को किसे दिखाऊँ। मन को कुछ समझ नहीं। भर आ गया बस यूँ ही। इस भरे मन का बोझ बताऊँ किसे। बंद कमरे में बह जाऊँ सुनाऊँ किसे। रहता नहीं काबु खुद पर ऐसे में। कहना चाहता हूँ सब कुछ कहूँ किसे। सफलता के द्वार खङा ना अंदर ना बाहर। डर का मकान है खुला आसमां छोर बेघर। किस ओर जाना होगा संशय हर पल। देख रहा खिंच ले कोई की बह जाये कल। खुशियों की घङी में बह बह जाऊँ मैं। सफलता के मार्ग पर मुस्कुराऊँ मैं। डर का कोई मुकाम ना हो बस इतना है। कोई मेरा अपना और मन का हो सपना है। अँधेरे कोनो में हाथ कोई आये भी। बहती अँखियों को पोंछ जाये भी। बैठ अकेले संभाले था खुद को बताऊँ ये। इन अँधेरे कोनो से मिलाऊँ किसे। बहती अँखियो को दिखाऊँ किसे ।। -कवितारानी।