अगर सपने सच होते / Agar sapne sach hote

 अगर सपने सच होते


अगर सपने सच होते तो कौन भगवान को पुछता,

सब सपनों में ही सहते कोई नहीं जगाता।

अगर सपने सच होते ते कौन काम करता,

कौन मेहनत की रोटी कमाता।

कौन पढ़ाई करता सब बीना पढ़े पास होते,

कौन किसी से पुछता सब सपने देखते।

कोई अपनी नौकरी का, तो कोई अपनी शादी का,

कोई अपनी आजादी का, तो कोई अपनी प्रेमिका का, तो कोई  स्वर्ग का।

अगर सपने सच होते तो कौन दुनिया में रहता,

तब तो सब स्वप्न लोक से ही काम चलाते।

्गर सपने सच होते ते सब निष्कर्म में, आलस से भरे मद के प्याले होते।

अगर सपने सच होते तो ये लोक एक आश्चर्य लोक दुष्कर्मों से भरा होता।

अगर सपने सच होते तो, ना मैं होता, ना तुम होते, जो होते सब सपने होते।

इसलिए सपने कभी सच नहीं होते।।


-कवितारानी।

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