दर्द का साये / dard ke saye
दर्द का साये
हर वक्त मेरे दिल में आये।
कुछ सपने तोङ लाये कुछ दिल तोङ आये।
जब भी आये मुझे तङपाये।
यही है मेरे दर्द के साये।।
कभी बनकर दोस्त मुस्काये,
कभी दिल ये समाये गम लाये।
कभी आँखों से आये,
और कभी खामोशी से निकल आये।
ये मेरे है गम के साये,
जो हर एकान्त में मुझे तङपाये।
कभी रिश्तों से आये अपनों से लाये।
तो कभी खुद से घबराये।
पर जब भी आये मुझे भिगाये।
ये मेरे गम के साये, क्यों मुझे तङपाये।
हर साये से मुझे डराये,
कभी अँधेरों मे ले जाये।
कभी मुझको सताये कभी मुझको तङपाये।
मेरे गम के साये हर वक्त मेरे दिल में आये।
ये मेरे दर्द के साये।
-कवितारानी।
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