काश / kash



काश

काश कोई मेरा भी अपना होता,
काश सब भुल जाता कभी याद नही रख पाता।
काश मैं कुछ समझ पाता,
काश जो मन चाहता वो पा जाता।
काश ऐसा हो जाता काश सच हो जाता,
हर सपने को में सच कर पाता।
काश जो में मांगता वो मुझे मिल जाता,
काश सपने ना देखता जो देखता लौकिक होता।
काश खुद से सर्माता, सब बता जाता,
काश जिसे प्यार करता उसे बोल पाता।
इजहार करताचाहे सकारात्मक जवाब ना आता,
काश अपनी दुनिया अपनी मर्जी से जी जाता।
काश हमेशा मन की कर पाता,
मैं जो लिखता, जो कहता उसी के कर जाता।
काश मैं कभी झुठ ना बोलता,
सत्य पर ही दुनिया जी जाता।
काश सबको अपना गहरा दोस्त बना पाता,
काश किसी के भी मन को पढ़ पाता।
काश मैं इस दुनिया मैं ना आता तो ये सारे गम ना पाता,
इस काश को अपना साथी ना बनाता।
तो इस संसार को जी जाता...

-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

तुम याद आते हो। (tum yad ate ho )