मेरी तन्हाई / meri tanhai



मेरी तन्हाई

अक्सर ये बेवक्त आई, कभी भीङ में तो कभी अकेले में आई।
कभी आँसु लाई कभी बनकर गम समायी, हाँ ये मेरी तन्हाई ठेरों सवाल लाई।।

ये रिश्तों से आई नहीं ये अजनबीयों से आई, ये तो दोस्तों से आई ये तो पहचान से आई।
नहीं ये तो मेरे दिल से आई, ये मेरी तन्हाई अनेक उलझने लाई।।

ये क्यों आई क्यों मुझको बहकाये, ये तो नई मंजिल दिखाये नई डगर है लाई।
अरे ये तो पथ भ्रमित करने आई, मेरी तन्हाई मुझको हर वक्त उकसाये।।

अरे ये तो आँखों से दिल में आई, अरे ये तो बातों से भी दिल में आई।
नहीं ये तो कानों से दिल में आई, ये मेरी तन्हाई दिल के रोग है लाई।।


हजारों दर्द ले के चली आई, दिल में गमों की बारात लेकर आई।
कभी रुसवाई कभी राजी बनकर आई, हाँ ये मेरी तन्हाई दिल की गहराई लाई।।


हाँ ये मेरी तन्हाई हर पल नई राह लाई, कभी गम-कभी खुशी से चमक लाई ये तन्हाई।।

-कवितारानी।

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