नया दौर


नया दौर 


नये लोग, नयी हवा,नया पानी,नयी कहानी,

मैं आया बहुत महीने बाद नयी जगह।

ये दौर नया,यहाँ मेरे दौर नया,

नयी उमंगे है,नये सपने हैं, 

नयी आस संग,नई जगह हूँ।।

नया दौर, नया जोर,जोश जगाना है, 

जाना है नयी ओर।

रूका नहीं कहीं अब तक,

सवाल वही,कब रहूँगा यही। 

नयी आस,नयी प्यास,

अभी ठहरा ही हूँ, चाहूँ कुछ खास। 

नयी उमंग है, नयी खानी हैं, 

रूका हुआ लग रहा, 

अपना सा लग रहा ,

सपना सा लग रहा,

सपना सा लग रहा जो जीया अभी, 

हैं सब वही,

मैं हूँ वही,

बस जोश नया,

दौर नया।।


- kavitarani1

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

वैचारिक मतभेद / vecharik matabhed

दो गज जमीन / do gaj jameen