कोई मेरी परवाह करता है



कोई मेरी परवाह करता है 


कल बात हुई एक दोस्त से,

वो कल को भूलाकर आज की कहता है।

जो कद्र ना करता मेरी ज्यादा,

आज वो मेरी सुरत पर कहता है।।


अच्छा है उसे याद नहीं कल क्या हुआ, 

मेरा मन भी सबसे अच्छा रहना चाहता है। 

भूला बैठा वो मुझे अकेला छोड़ने  को,

और आज मेरे अकेलेपन की बात करता है।।



जीत लिया मन उसने कह के मेरे उतरे चहरे को,

कई बरसों बाद सुना,आखिर कोई तो चेहरा पडता है।।


हकीकत से वाकिफ वो भी होगा,

कैसे दिल को मैं राजी करता हूँ।

जैसे कटे है दिन बचपन के,

जवानी के बोझ को कैसे जीता हूँ।।


चलो ना समझा मेरे आज के हालातों को,

पर जान अच्छा लगा कोई तो है जो,

कभी-कभार कह कर ही,

मेरी कहीं तो परवाह करता है।।


Kavitarani1 

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