ऐसे में कैसे रहे | Ese mein kese rhe | How we can live in it



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ऐसे में कैसे रहे 


जब झूठ अपनी ऊँचाई बढ़ा ले।

सच अँधेरे में खुद को छुपा ले।

विश्वास कहीं घायल पड़ा हो।

यकीन एक शब्द पर ना हो।

संदेह पर हर बात रहे।

शक पर बुनियाद टिकी रहे।

कैसे कोई सच पर अडिग रहे। ।

हर कोई मिठी मुस्कान भर ।

अन्दर से षड़यन्त्र करे।

पिठ पिछे बुराई करे।

अन्तर्मन से शुध्द कह कर ।

सत्य को असत्य कह कर।

अपना ही बस मुल्य कहे।

ऐसे लोगों में साफ मन कैसे जीये।

मासूमियत ऐसे में कैसे जीये।।


Kavitarani1 

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