कहने दे कभी | Kahane de kabhi


कहने दे कभी- वीडियो देखे


कहने दे कभी 


 कहने दे कभी, मेरी बातें अधुरी।

तु मेरी ना थी,ना कहानी मेरी।


रहने दे अभी,अपने बीच दुरी।

तु भी खुश है,खुद है खुशी मेरी।


जब कभी फिर तु पलट आयेगी।

सुनना आराम से जो कसक पायेगी।।


खोना ना तु जग की रोशनी में। 

अंधेरे कोने में कहीं दफन रहना मेरे। ।


दफन है मन में अरमान कई।

सपनों की कब्रें लगी है यहीं। 


खोया रहा हूँ बरसों से मैं भी। 

खोयी रही तु मुझमें कहीं। 


आज भी ज़रा सा कोई दगा हो।

यादों की तह से कुछ तु दफा हो।


अनछुए पहलुओं से सुरत दिखती वही।

दिखाई तुने अपनी बातें कहीं। ।


सुनना चाहुगाँ,खता मेरी हो जो लिखी।

गुनहगार हूँ दिखाना कोई तो कमी।


नमी ही रही जो तु थी पास में कहीं। 

आँखो में बसी और ले गई थी हँसी। 


किस गुनाह की दी थी सजा बताना मुझे। 

वक्त मिले तो अपनी भी सुनाना मुझे।


रहने अभी जो आग है मन बुझी।

वक्त आने पर कहेंगें तु सनना सही।।


Kavitarani1 

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