शाम जरूर होगी | Sham jarur hogi


Click here to see video

यह एक कविता उन लोगो के लिए जो अपनी मंजिल के काफी पास आने के साथ ही हिम्मत हारने लग जाते हैं। यह कविता हमें प्रेरित करती है कि हमें कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए।

शाम जरूर होगी 


है धुप तो क्या ?

 शाम ना होगी ।

तेज बारिश है तो क्या ? 

बारिश खत्म ना होगी ।

मिट गई सर्दी और गर्मी भी,

क्या रात नहीं होगी ।

है भ्रम में जग सारा,

है भ्रम में जग सारा,

धुप है बहुत, 

मै सब्र नहीं करता,

पर जानता हूँ,

शाम जरूर होगी ।

फिर दिन निकलेगा,

फिर नयी उमंग होगी ।

है उमस बहुत अभी,

ये गर्मी एक दिन खत्म जरूर ।

है धार तेज नदिया की,

होगी खत्म बारिश तो,

ये दरिया भी पार होगी ।

तु सब्र कर ऐ पथिक,

तु हिम्मत रख है राही,

है तेज धुप तो क्या, 

शाम नहीं होगी ।

शाम जरूर होगी ।।


Kavitarani1 

268

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मैं...कब / Main kab

काश ! तुम होती साथ / Kash ! Tum hoti sath

वही गर्मी है | Vahi garmi hai