ये शाम | Ye shaam




ये शाम 


पर्वत स्थिर अपनी जगह  पर,

आबु पर छाई घटायें बहुत हैं ।


गर्जन करते बादल पर्वत शीर्ष को छुपाते,

मैं परित्यक्ता के गाँव की छत पर बैठा हूँ ।


लग रहा जैसे सुर्यास्त आज नहीं हो रहा , 

और अभी तो ये आषाढ़ ही चल रहा ।

मन शांत है, खुश सा है ।

कोई गम नहीं जीवन में ना कोई दम सा है ।


सब शांत है, ये शाम शानदार है ।

बादलों से कुछ बुँदे हल्की हो गीर गई ।

तन-मन पर शीतलता का माहौल कर गई ।

बादलों से छायादार मौसम खुशमिज़ाज है।

सब देख मन कह रहा है।

ये शाम शानदार और माहौल आलीशान है।

ये शाम मजेदार है ।।


Kavitarani1 

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