गुरुवर नमन | Guruvar naman



गुरुदेव नमन

हे गुरुवर ! गौरवगान तुम्हें। 

ईश्वर तुल्य आप, मन से सम्मान तुम्हें।।


पथ प्रदर्शक आप ही, आप ही आदर्श हमारे।

निर्बुध्दि हम आप ही ज्ञान हमारे।।


नत मस्तक नित जो आप जो किये।

अशांत उर प्रकाश कर शांत ह्रदय दिये।।



अभिभावक भाव नियमित आप रहे हमेशा।

पावक ज्ञान संयमित राग दिये हमेशा।।


हम नादान नटखट शरारत करते आप से ही।

शक्त संयोजित नियंत्रित करते भी आप ही।।


हर दिन, हर पहर, नव ज्ञान सागर दिये आप।

नियमित रह, हर भ्रम भूल, बिसरा आप, ईश्वर तुल्य रहे आप।।


कठोर हिमालय बन ज्ञान गंगा स्नान दिया।

विकट मोङ संशय हर आप ही ने गतिमान किया।।


इस जीवन जीव अभिमानी बस काया लेकर आये।

आलोक ज्ञान लोक का जलाकर आप से ही मानव कहलाये।।


हे गुरुवर! करुणायल आभार आपका। 

जीवन जोत प्रकाश गौरव फैला मुझमें आपका।।


नित नमन नत मस्तक प्रणाम करुँ मैं। 

इस जीवन ज्ञान आलोक से आपका ही बखान करूँ मैं।।


जीवन आधार विशाल वट हर पल्लव नमन आपका।

इस जीवन श्री सर्वपल्ली राधाकृष्णन सा हो आलोक, चाहे आशीष आपका।।


सितम्बर पांच एक अवसर संजोये करें सत् सत् नमन आपको।

हमारे जीवन में शिक्षक बन कृपा की आभार आपको।।

नमन आपको।।


-कवितारानी।


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