सुकून मिला | sukun mila



सुकुन मिला


कहीं दबे मन के कोनों से कराह और कसक लगती थी,

दिल में चाहत है दबी बहुत ऐसी कराह जगती थी,

एक पल को जब बात हुई अनजान से, अनजाने से,

दिल को जैसे ठण्डक और राहत मिली, हाँ सुकुन मिला।।


लब्जों में बयां करूं कैसे क्या दिल को हुआ,

वो आवाज अनचाही सी आई और दुनिया ही भूल गया,

बात हुई ऐसे जैसे मैं था यहीं तक सिमट गया,

कहुँ कैसे- क्या था ये हुआ, बस समझ आ रहा, सुकुन मिला।।


धङकनों पर काबु ना रहा,

अनजान था वो अब अनजान ना रहा,

असहाय दिल बेवजह फिर उलझ गया,

बस लग रहा अभी कि, सुकुन मिला।।


यह ऊर्जा का संचार हर नब्ज में दौङ रहा,

है जहर प्रेम की ये प्रेम ही रगों में घुल गया,

दवा ढूँढू जाकर कहाँ, मर्ज भी है कहाँ,

कारण तलाश रहा और मन बता रहा, सुकुन मिला।।


है सवाल तो रहने दे,

ऐ रवि रत रहता है, फिर रत रहने दे,

लग सपना था, सपना ही मान ले,

है सुकुन दिल में तो, सुकुन ही जी ले।।


मत कह की क्या मिला,

दिल को कह रहा तो कह दे,

अनजाना, अनचाहा लम्हा था,

इसमें सुकुन मिला, हाँ सुकुन मिला।।


- कवितारानी।

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