बह रहे है नीर / Bah rahe hai Neer



बह रहे है नीर


बिन कहे बह जाते,

नम करते सुखी जमीं,

छोर अंतिम ठोर तक,

बहते रहने निरंतर नीर,

कौन ठेस कर गया,

दब गयी कौन प्रत्याशा,

रोक दिया किसने,

दबा दिया मन को,

दब नहीं रहा सागर,

ऊफान पर है जलधि ये,

सीधी रेखा बन कर,

बह गया अधीर,

पीर ये कौनसी,

कहाँ की छाया है,

साग ना संबंधी वो,

ना मन का ना तन का,

जाने कहा से रोक रहा,

दबा दिया अनायास यो,

कह रहे अरमान अब,

आजादी बह रही है,

जो हलचल ना बही,

ना रही मन जो,

वो सब नीर में कह रही,

ना ललकार हुई,

ना हुई कोई पीर,

इस बार बहे बङे रहे ये धीर,

कौन घङी आ गये हो,

बह रहे हो रण भीर,

मुझमें मुझे ना छोङा,

रहा ना कुछ भी,

बह रहे है नीर,

कब होंगे नम कपोल,

खुशी के उन झरनों से,

कब होगी बात खीर,

मन बहे,

बह रहे है नीर,

बह रहे है नीर।।


-कवितारानी।


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