देश, धर्म और कर्म पर कविताएँ

 देश, धर्म और कर्म पर कविताएँ

 

देश और धर्म ही है जो मानव को अपने अस्तित्व में संपोषित और आदर्श बनाये रखते है। मानव के कर्म ही उसे समाज में सम्मानित रखते है।

यहाँ कविताओं के माध्यम से सबको देश और धर्म के प्रति और निष्ठावान बनाने की प्रेरणा का प्रयास किया गया है। ये कविताएँ आपको अपने कर्म से और प्रेरणा से जोङने का कार्य करेगी।  

प्रस्तावना

कविताएँ मानवीय भावनाओं का स्त्रोत होती है, इनसे हमें पता चलता है कि कवि ह्रदय किस तरह का भाव रखता है। हमारी कविताओं में आपको हमारे देश भारतवर्ष और यहाँ के लोगो के दिलों के जज्बे की मिशाल देखने को मिलेगी।

मेरी कविताओं का स्त्रोत केवल मन की उद्वेग है और यही से मेरे टुटे-फुटे शब्दो का जन्म हुआ है जिन्हें संजोने का कार्य मेरे धर्म पति श्री रविकांत चीता जी ने किया है। यही मेरे प्रेरणापुंज है। 

इन कविताओं में किसी को भी इशारा नहीं किया गया है ना किसी को निचा दिखाने की कोशिश की है। ये सारे भाव हमारे है और देश, धर्म और कर्म प्रेमियों के लिए है। किसी को कोई बात बुरी लगे तो हम क्षमा चाहते है।

देश बिना हमारा अस्तित्व नहीं, धर्म बिना नैतिकता और पुण्य का कोई भाव नहीं, कर्म बिना मानव का जीवन नहीं यही सब इन कविताओं के सार में आपको देखने को मिलेगा। ये कविताएँ आपके मन को जरुर स्पर्श करेगी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

मुझे मुझमें रहने दो / mujhe mujhme rahne do