चल हॅस दे तु / chal has de tu



चल हॅस दे तु


ले चल तुझे हॅसाता हुँ,

ज्यादा मन समझना, पर तुझे फसाता हुँ।

पता है मुझे तु फसेगी नहीं,

पर जानता हुँ तु हसेगी ही।

क्योंकि तु है छोटी सी, प्यारी सी, नन्ही सी, मुन्नी सी, चुन्नी,

और मैं करता रहता हुँ कोशिशें हॅसाने की।

तु जानती नहीं कि दुनिया बङी शैतान है,

और तु जानती उसमें बङी हैवान है।

 कभी कमीना तो कभी पागल तुने कह दिया,

चल छोङ मैंने कुछ मन पे नहीं लिया।

तु टाइम को अच्छा पास करे है,

और मेरे टाइम पर रास करे है।

देखो कितना अच्छा प्रयास किया है,

तुझे हॅसाने को रेप किया है।

अब हॅस भी दे कि लिखा ना जाता,

मन को कुछ अब लिखा ना जाता।

बातें मेरी तु एक्सपेक्ट ना कर,

मेरे सिवा ऐसा, ऐसा किसी से एक्सेप्ट ना कर।

दोस्ती अपनी युँ रहेगी,

तु हॅसेगी तो मेरी कलम ना चलेगी।

तो हॅस ना, पर अब चल हॅसना,

हॅसना, हॅस, हॅस, हॅसना...

हॅस दी क्या..


-कवितारानी।


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