लम्हों / Lamho
लम्हों
ऐ लम्हों ठहरो जरा,
साथ हूँ मैं, भुलों ना।
कौन मेरा तुम्हारे सिवा,
कहना है तुमसे रहना है संग सदा।
ऐ लम्हों ठहरो जरा,
पता है रफ्तार तेज बहुत है तुम्हारी।
मैं तो रुक जाता हूँ चलते हुए,
अब वो जोश, हवा नहीं मुझमें।
जो बढ़ाता था आगे मुझे,
तो कुछ ही पर सुन लो मुझे।
ऐ लम्हो ठहरो जरा,
कुछ बुन लु मैं साथ तुम्हारे।
कि सुनाने को किस्से हो,
अकेले में गा सकुं।
कुछ ही पर यादों के हिस्से हो,
ऐ लम्हों साथ दो जरा,
कि बुन लुँ मैं यादें यहाँ,
ऐ लम्हों साथ ठहरो तो जरा।
साथ हूँ मैं सुन लो जरा,
पुकारता हूँ ध्यान दो ना।
मेरे संग कुछ दुर तक चलो जरा,
कह दो की पास हो यहाँ,
ऐ लम्हो ठहरो जरा।
वो आती जाती यादें,
वो किस्से ओर बातें।
संग चलते हुए ही तो बुनी थी,
कही थी जो भी,
किया था जो भी,
वो बातें साथ ही है यहाँ।
हाँ वो यादे है,
वो बातें है,
कहती है जो,
साथ रहने की सौगाते है।
ऐ लम्हों कह दो जरा,
साथ चलनें की कह दो जरा।
साथ लेकर ही चलो यहाँ,
ऐ लम्हों ठहरो जरा,
कहता हुँ साथ तो चलो जरा।
ऐ लम्हों चल संग जरा,
ऐ लम्हों ठहरो जरा।।
-कवितारानी।
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