पहला / Pahla



पहला


पहला कौन जो मुझमें समाया,

मन को भाया हाथ ना आया।

या मन को भाकर तन ललचाया,

या मन को छोकर शौर मचाया।

या जिसने मुझको खुब सताया,

पहला कौन जो मुझमें समाया।।


एक वक्त था जब आ जाते थे तेरी रोशनी में हम।

भुल गये थे अंधेरे ठण्डक को शांति को हम।

धुल उङी तो आँखे भर आयी जब।

याद आयी अंधेरे की जब धुप से आँखे चरमराई अब।।


तो पहला कौन जो मुझे रुुलाया।

या सांसे भर दी ओर तङपाया।

या सपने सुन्दर साथ देकर भुल गया।

या मन को सिखाकर छोङ गया।

पहला कौन जो मुझे हराया।।


वो वक्त पहर भुला ना हुँ, ना याद करके उलझा हूँ।

शुक्र करुँ की आगे हुँ, उससे अब मैं वाकिफ हुँ।

समझ आई दुनिया कि अब प्रौढ़ में गीना जाता मैं।

महरबानी है कि अब समझदार कहलाता मैं।।


तो पहला कौन जो मन का बन पाया।

इस जग के नियमों को आसानी से समझ पाया।

तो पहला कौन जो आगे है, सिख दुनिया का साथी है।

इस दुनिया से अब वाकिफ है।

दृढ़ ह्रदय अब साकी है।

पहला कौन ...


-कवितारानी।


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