क्यों मेरा मन उदास रहा / kyo mera man Udas rha

 क्यों मेरा मन उदास रहा


बुँद-बुँद बरस रही, दुर-दुर तक फैल रही।

सावन में फिर ये अठखेलियाँ है कर रही।

कभी झुम रहा है मन कभी रहा है मन।

क्यों अब बैचेन है आँखों में ना नींद है।

हँसने को चाहता है पर हॅस नहीं रहा।

रोने को कहता है पर रो भी नहीं रहा।

खुद से ही परेशान है क्योंकि अभी भी नादान है।

गलतियों से डर रहा पर मरनें से ना डर रहा।

आज फिर मन बैचेन है अकेला है क्यों फिर आज।

मंजिल को पाने की चाह में तन को टटोल रहा।

बुँद-बुँद करके फिर बरस रहा।

सब तरफ एक रोनक है मौसम में भी महक है।

सब का मन उत्साहित है फिर में क्यों हताश हूँ।

दुर-दुर तक महक फैली आज फिर घटा गहरी।

बिरली तङक जोर से रही, बादल भी गरज रहे।

पानी की हर लहर नई, नया है ये परवान।

बुँद-बुँद में है सबकी प्यार फिर मेरा मन क्यों उदास।

क्यों मन मेरा घबरा रहा, क्यों घर बैठा उदास रहा।

क्यों हर वक्त सोंच रहा, क्या ये सोंच रहा।

कुछ समझ क्यों नहीं आ रहा किसे ये ढुँढ रहा।

इस मनमोहक सौन्दर्य भरे वातावरण में इस खुशहाल,

मौसम में भी मेरा मन क्यों उदास रहा।

क्यों मेरा मन उदास रहा. किससे पुँछु इसका जवाब।

मेरा मन किसे ढुँढ रहा, क्यों ये उदास रहा।


-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

तुम याद आते हो। (tum yad ate ho )