यादों के पल / yadon ke pal

यादों के पल 


याद आये वो पल जब में बच्चा था, मन का थोङा सच्चा था।

याद आये वो दिन जब में कच्चा था, पर पङने में सबसे अच्छा था।

याद आयी वो यादें जब दिन भर मस्ती की, हर वक्त एक नई कहानी थी हर वक्त मजा था।

हर समय आजादी थी स्कूल की यादें थी, दिल कि बातें थी भविष्य की सोगातें थी।

याद आये वो पल जब दोस्तों का साथ रहा, हर वक्त अपना मजा रहा कभी लङाई थी।

तो कभी बस अपनी पढ़ाई थी, कभी घुमनें जाते कभी पार्टियाँ मनाते।

हर दिन कुछ नया था आज क्यों ये ना रहा, बिछङे है फिर आज याद क्यों उनको करें।

मन क्यों उन्हीं यादों में अब खोया रहे, अब भी करुँ मजा चाहे हो जाये कोई सजा।

पर वक्त कहाँ ठहरता दोस्तों का मैला कहाँ लगता, कहाँ मिलती वो सौगातें दोस्तों के साथ है।

दुनिया की सौगातें अब तो बस दुनिया बसाओ, नौकरी पर जाओ भविष्य के प्लान बनाओ।

फिर भी याद आती अकेले में कभी भुली बिसरी यादें, तो मन को समझाओ और सो जाओ।।


-कवितारानी।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

मुझे मुझमें रहने दो / mujhe mujhme rahne do