जागो ऐ देश के युवक / jago e desh ke yuvak
जागो ऐ देश के युवक
इस मिट्टी से उपजे, इसका गुणगान करो।
जग भ्रम में ढुब रहा, जागो युवा ललकार करो।
ललकार करो कि हिल जाये चट्टानों से इरादे वो।
गाते रहते दिल्ली में टुकङे के इरादे लेकर जो।
कोई जिन्ना आके फिर भारत का ना मान हरे।
जागो ऐ भारत के युवक विनती हम आज करें।।
ना केसरिया मटमैला हो ना हरा गायब होने दो।
समझो चक्र कि किमत श्वेत का गुणगान करो।
अँन्धकार फैला है सब ओर सोशल साइट नाम पर।
गुणगान करो ज्ञान का ना किसी का अभिमान करो।
जागो ऐ देश के युवक देश का तुम उध्दार करो।
जो देखा सपना गाँधी, कलाम ने उसे तुम साकार करो।।
सोया है आज तेरा, मन, मस्तिष्क निस्तेज है।
बदलती करवटों में क्यों केवल दीवानगी है।
दिवास्प्न से उठ जरा अपनी भारत माँ का नाम।
बदलते परिवेश में विकास का पथ पान करो।
जागो ऐ देश युवक देश का तुम नाम करो।
ज्ञान ज्योत जलाकर खुद में देश का उध्दार करो।।
वो भारत भाग्य विधाता उद्गार कर रहा।
आज को सोंच रहा, आज को गा रहा।
इस आज की, आँच से कल का स्वप्न साकार हो।
बनती बिगङती बातों से खुद को करे आजाद हम।
देश के उध्दार में हो भागीदार हम।
जागो ऐ देश के युवा देश का उध्दार करो।।
-कवितारानी।
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