रुक जा रहा / ruk ja jaraa

रुक जा रहा


रुक जा जरा...

साँस ले लुँ मैं,

रुक जा जरा,

साँस ले लुँ मैं...

थक गया हूँ,

चलते-चलते,

थक गया हूँ,

चलते-चलते है।

रुक जा जरा,

साँस ले लूँ मैं।

तु तेज बङा,

जा रहा हूँ,

गति तेरी,

बहुत तेज है,

देखुँ कहाँ,

की कोई छोर नहीं,

मन का पंछी,

टिके ठोर नहीं,

बन चकोर,

उङता फिरुँ,

जग में अपने,

ठहरुँ कहाँ,

रुक जा जरा,

साँस ले लुँ मैं,

रुक जा जरा,

साँस ले लूँ मैं।

इस बार तु,

मान ले मेरी, 

कहता है मन मेरा,

सुन ले जरा,

दो पल की,

रुक जा जरा,

साँस ले लूँ मैं।

ऐ मनवा तु धैरी,

माने नहीं मेरी,

सुनता नहीं मेरी,

सुनता नहीं कभी,

करता नहीं कभी,

करता है बस मन की।

रुक जा जरा,

साँस ले लु मैं,

रुक जा जरा,

साँस ले लुँ मैं,

थक गया हूँ,

ठहर जाऊँ मैं,

रुक जा जरा,

रुक जाना।

कभी-कभी मन मैं,

प्रश्न हो ये मन मैं,

मेरे मन में तु होवे,

आये कहीं से हवा,

हवा सिहर करें।

कह दुँ तुझे,

मन दुँ तुझे,

मन का मैल हरे,

रुक जा जरा,

मन मेरे,

रुक जा जरा,

मन मेरे,

कुछ देर देर तो मैं,

साँस ले लु मैं,

रुक जा जरा,

कुछ देर रुक जा,

रुक था वक्त के,

वक्त के साये में,

रुक जा जरा,

साँस ले लु मैं,

रुक जा जरा,

रुक जा जरा।।


-कवितारानी।

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