गुजरे लम्हें / gujare lamhe
गुजरे लम्हें हजारों लम्हों को एक पल में भुला दिया। सालों की यादों को एक पल में मिटा दिया। बित गये जाने कितने दिन पता नहीं चला। याद रहे लम्हें वो जो मदहोश करने वाले थे। याद रहे वो पल जो तीर की तरह घाव करने वाले थे। नये फसाने बन गये पल भर में कई। तो कई नयी यादें बन पङी। बरसों के किस्से जरा से लम्हें में पुराने हो गये। विश्वास का हुआ कत्ल कही, तो कहीं नया रिश्ता बना। यादों के नये तराने बने कहीं तो कहीं भावनायें नई जुङी। फिर भी याद आता है वो लम्हा जो हसीन था। याद है वो पल जो कुछ खास था। सोंचते थे बचपन से जिस रिश्तें के बारे में। दुर उससे जाने को जी चाहता है। भविष्य की डगर ये सब कुछ मुश्किल नजर आता है। आती है अजब भावनाये जो बहकाती है महसुस कराती है। आती है अजब भावनायें जो बहकाती है महसुस कराती है। की अकेले है हम कुछ नहीं साथ। की डराती है ये के कुछ नहीं तेरे पास। की कहती है की क्या भविष्य होगा क्या भुत था। यह उलझाती है कि तेरा कोई अस्तित्व नहीं। तु बदनसीब है यही सच है।। -कवितारानी।