मेरी नारी / meri naari
मेरी नारी
गुणवान हो वो हो शिक्षित नारी,
काम काज जाने सब, जाने दुनिया दारी।
बङा छोटा सबका करे समान सम्मान देख पद दे उनको मान,
समझदारी भरी हो अंग भंग में उसके,
भले बुरे का करे खयाल, हो लज्जाशील, वीर कोमल वो नारी।
दे मुझे माँ का दुलार, बहिन सा रखे खयाल,
करे बङो सा सम्मान, दे पत्नी का प्यार।
रिती परम्परा का रहे ज्ञान,
व्रत उपवास कर करे घर परिवार मंगल काम।
उसके प्रभाव से सबका हो उद्दार,
मृगनयनी हो वो हो कोमलांगी वो शिक्षाशास्त्री हो वो।
लज्जाशील ग्रहणी, मानमर्यादा जाने वो जाने सबकाम काज,
दुख सुख की साथी हो, हो व मदमस्त दोस्त मेरी।
आदर्श भारतीय पतिव्रता पत्नी हो वो मेरी नारी।
कर सकुं बखान उसका ले जाऊँ हर जगह उसे।
जो समझे मुझे और मैं समझ उसे, आदर करे सत्कार करे वो।
मुझे ये सब गुण ले बने वो मेरी आदर्श नारी।
कर्ता रहूँ बखान ये कि मिले मुझे ऐसी घर वाली।।
-कवितारानी।
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