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जब दोस्त सच्चा होता है / jab dost sachha hota hai

जब दोस्त सच्चा होता है   दोस्ती बङी प्यारी होती है, जब दोस्त सच्चा होता है। दिल का बच्चा हो, समझ में अच्छा हो, बात में पक्का हो, तब दोस्त की दोस्ती का भी मजा आता है। उसके रुठने और अपने मनाने का भी मजा आता है। मजा आता है जब थोङी रुसवाई छाए, जब मोज मस्ती में दिन बीत जाए, बीते पल रात में सपने बन जाए। ऐसी दोस्ती मे जान लुटाने को जी चाहता है, जी चाहता है चले ये दोस्ती जन्मों जनम। फिर वही बात दोहराने को जी चाहता है, दोस्ती बङी प्यारी चीज है। जब दोस्त नाजुक सा मस्त मोला नमकीन सा हो तो। हर पकवान फिका नजर आता है। ये जहाँ झुँठा नजर आता है। नजर होती दोस्ती की अठखेलियों में इसमें समाज कहाँ नजर आता है। आज ऐसी दोस्ती पाने को जी चाहता है। जी चाहता है ऐसी दोस्ती सलामत रहे जन्मोंजनम, हर जनम ऐसे यार को पाने को जी चाहता है। फिर यही बात मन दोहराता है। कि दोस्ती बङी प्यारी चीज है।। -कवितारानी।