बात सीधी थी वो / baat sidhi thi vo

बात सीधी थी वो


बात सीधी थी वो,

सीधे दिल तक गई।

पर अनजाने ही सील सी गई।


एक तरफा है प्यार तभी सहते हैं।

अक्सर आपकी बात कहते हैं।

कोई चाह कैसे बनाये।

सपने बन कोई कैसे छाये।

कैसे कोई प्यार जगाये।

सोये ह्रदय को उपवन बनाये।


हमने रस्ते खोले हैं।

बिन मतलब लोगों को तोले हैं।

कुछ समझ परे दिल से ही।

पर जो भाया वो मेरा था।

कोशिशें नहीं की पाने की।

पा ना सका खुशी जमाने की।

उसी दुख को जीते हैं।

अकेले में तुम्हें याद करते हैं।

और लब्जों को परदा करते हैं।

सीधे शब्दों को जीते हैं।

मुश्किल होते यही बात है।

वक्त अकेले कटता है।।


-कवितारानी।

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