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जब किस्मत खराब / Jab Kismat ho Kharab

जब किस्मत खराब  कहते किस्मत खराब जब वक्त हो खराब। साथ नहीं देती तब सोला और शराब, तब कहता है मन, कैसी परिस्थिति है आई ना मन बस में ना तन। कहने को राज होता है तन का पर प्रधानमंत्री तो मन होता है। कैसी ये स्थिति आई ना खुद बस में ना जग बस में। खुद पर विश्वास करुँ तो जग साथ नहीं। जग पर विश्वास करुँ तो खुद हौंसला खो देता हूँ। कैसी ये विकट घङी है आई, ना अपनी चलती ना अपनों की। अपनी चलाऊँ सही मान तो अपने रोकते हैं। अपने चलाए गलत तो मैं चलने नहीं देता। कैसी ये घङी आई है, ना अब बस में ना कल बस में। अब वर्तमान को सभाँलु तो कल धुँधला भविष्य बनता दिखता है। और भविष्य को सुधारने चलुँ तो अभी स्थिति बिगङ जाती है। हाय कैसी किस्मत है पाई ना आत्मा बस में ना परमात्मा। आत्मा को संभालु तो परमात्मा दूर नजर आते हैं। और परमात्मा को मानुं तो आत्मा साथ नहीं देती है। कैसी मुश्किल स्थिति आई है ना बंधंन बंधा ना बंधंन वाले। बंधंन मजबुत करना चाहूँ तो बंधंन वाले दूर जाते हैं। बंधंन वालों को पास लाना चाहुँ तो बंधंन छकने लगता है। हाय कैसी घङी आई है ना चाह कर भी पास खङी रुसवाई है। ना अपना कोई आता नजर ना पराया कोई। अपने...