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दो राहें / Do raahe

  दो राहें राहें कहीं खत्म नहीं होती, कहते हैं राहें खत्म नहीं होती। पर हर राह पर दो राहें आती रहती है। हर दो राह लक्ष्य को प्रभावित करती है। अब मानव हूँ समझ नहीं की सही है कौनसी और गलत कौनसी। कहते अच्छी दिखने वाली राह अच्छी नहीं होती। पर बुरी दिखने वाली की जिम्मेदारी भी कोई नहीं होती है। कहते हैं कठिन राह ही असली जीवन की राह होती है। वो अनुभव, त्याग, दर्द, समझ, ज्ञान से भरी होती है। और बुरी राह आराम, सुख और क्षणिक मौज देती है। फिर सुना की क्षणिक मतलब वर्तमान फिर सोंच की राह है। भुल-भुलैया है यहाँ इन राहों की एक सुलझाओ आगे फिर,  वही उलझन। तभी तो कहते हैं राहें खत्म नहीं होती, अन्त सिर्फ मौत है। और कुछ नहीं और चलते रहने वाला ही एक सही राहगीर है।। -कवितारानी।