जय राम जी / jay shree ram

जय राम जी


सुनने को जो बात, बैचेन था मन का पात।

समझने को जो घङी, ना चैन था कोई घङी।

आई है वो खुशियों की शौगात, लेकर खुशियों भरे हालात।

शुक्रिया करुँ अदा उस रब का दी जिसने ये शौगात।

अब हटेंगे दुख के फेरे, खुशियाँ होगी ढेरे-ढेरे।

मन भी मस्त, तन भी मस्त, सुन के ये बात।

हाँ हो गई पक्की शादी की बात।

कोई लक्ष्मी होगी घर में अब, खुशियाँ होगी अब सब।

अब मनेगी होली दीवाली हर्ष और उल्लास से।

अब गुँजेंगे भगवान को अब, होगी खुशहाली सब ओर।

अब मिलेगी मुझे राहत घर के काम से अब होगा आराम मुझे।

क्योंकि आ रही भाभी बनकर गृहलक्ष्मी जल्दी देने को आगाज।

बङी मन्नतों के बाद आई है ये घङी उत्सव है छाया, छायी खुशी।

तहे दिल से दुँ दुआ, सत् सत् करुँ नमन भगवान।

जय हो मेरे राम, जय श्री राम।।


-कवितारानी।

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