तेरी बात / Teri Batein

तेरी बात


आये पल हजार, हजार थे लम्हें।

हर पल थी उम्मीदें तुमसे, कुछ थे सपने।

जब भी मैंने सोंचा मिले तुम नहीं।

जब भी मैंने देखना चाहा, तुम दिखे ही नहीं।

जब भी मैंने चाहा सुनना, तुम बोले नहीं।

जब भी मैंने कुछ कहना चाहा, सुना तुमनें नहीं।

हैं इत्तेफाक या जोङी मैल नहीं।

है तेरा गुस्सा या लायक मैं नहीं।

या ये किस्मत है कि तुम मेरे नहीं।

पुछुँ मैं रब हर घङी, हर घङी।

क्या है तेरी मर्जी, क्या है तेरी मर्जी।

हो रहा दिल मझसे खफा, मैं तुझसे खफा।

क्या तुने चीज बनायी, क्या बनायी रजा।

ऐ मेरे खुदा है मेरे जहाँ।

अब जीना है या मरना, अब कहना है या चुप रहना।

मुझको बता तू मुझको बता।

है मेरे ईश्वर मेरे खुदा।।


-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

झुठी यारियाँ | Jhuthi yariyan

नव वर्ष- उमंग मिले / Nav varsh- umang mile

मैं राही बन चलता हूँ | Main Rahi Ban Chalta hun