रब्बा मेरे लिख दे मेरी जिन्दगी / rabba mere likh de meri zindagi
रब्बा मेरे लिख दे मेरी जिन्दगी
वो तेरी साँसे थी, वो थी तेरी गली।
मैं तो तेरी राह था, मैं तो था ही तेरी गली।
वो तू थी जो पहचानी नहीं,
वो तू थी जो मानी नहीं,
मेरा ईश्क रह गया, रह गयी मेरी आशिकी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।
ख्वाबो में... नींदो में... मेरी तकदीर की हो लकीर वही।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।।
हो आते जाते है ख्वाबो में मेरे कैसे रोकुं में।
उन खयालो को रोकुं कैसे में।
कैसे कह दुँ की बदल ही दी मैनें जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।।
वो तेरी आस थी की मैं चलता रहा।
रुका ना पल इक, मैं बढ़ता रहा।
कभी सोंचा ना थी की कोई होगी बेखुदी।
की कभी होगी बारिस ओ बोखुदी मेरी जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे तकदीर मेरी।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।।
वो बातें ना लिखना, मुझे सताये हमेशा।
उभर पाऊँ दर्द से कराहुँ सदा।
लिखना ना तु, दोखे भरी दोस्ती।
लिख देना भले, मुझे कोरे कागज सा ही।
ओ रब्बा मेरे, लिखना तो सही।
ओ रब्बा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।।
जब भी बीते लम्हों में खो जाता है मैं।
कांपता रुह तक सिहर जाता हूँ मैं।
हो खुद में ही छाई रहती मेरी बेखुदी।
कहूँ किसे, कैसे काटी है मैंने जिन्दगी।
ऐ खुदा मेरे, लिख दे मेरी जिन्दगी।।
रहुँ भीङ में खोया तेरा जस करता रहता।
टिस करता आह भरता याद ना पर करता।
करता नहीं बातें तेरी पर जिक्र छुटता नहीं।
अधुरी रही, खाली सी अधुरी मेरी किस्मत भी।
ऐ रब्बा मेरे दे दे मुझे जिन्दगी।
खो जाऊँ फिर जग में, करुँ जस अपना ही।
रहुँ खुद का बनकर जग कर दुँ प्रकाश ही।
तेरी काया का बखान करूँ सादु जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे लिख दे ऐसी जिन्दगी।
ओ रब्बा मेरे लिख दे मेरी जिन्दगी।।
-कवितारानी।
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