कली हूँ मैं / kali hun main

कली हूँ मैं


आज रो दी मैं तेरी फटकार से,

रोक ना पाई आँसु तेरी डाट से, 

खता हुई तो समझाना था,

मेरी गलतियों को देना सहारा था,

फिर से खिलकर की में महक उठती,

कली थी मैं कि फिर चहक उठती,

इतना ना दबाव डाल,

ऐ माली मेरे ना दाव डाल,

मैं सीधी साधी बढ़ती हूँ,

तु भी जानता है मैं बनती बीगङती है,

कोई हवा का झोंका हिलाता है,

कोई शीत लहर बुलाती है,

मैं जाती कहाँ तेरी बगीया से,

पानी ना ज्यादा डाल,

ना खाद से जला ज्यादा,

खाद डाल की सह सकुं,

काट- छांक की बढ़ सकुं,

सुन्दर उपवन जो मैं खिलुंगी,

तेरे आँगन की शान बनुँगी,

रुक जा थोङा की आगे बढ़ सकुं,

कली हूँ मैं तोङ ना की फुल बनुँगी,

कली हूँ मैं कि फिर खिलुँगी।


-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मैं...कब / Main kab

जैसे तुम वैसे मैं / Jaise tum vaise main

काश ! तुम होती साथ / Kash ! Tum hoti sath