बचपन के दिन / bachapan ke din
बचपन के दिन
अजब अनौखी बातें थी, अजब-गजब थे किस्से।
मिल बांटकर करते थे हम जब हिस्से।
अजब हमारी दुनिया थी, अजब हमारे कारनामें।
याद आते हैं मुझे बचपन के वो दिन प्यारे।
गजब की दोस्ती थी, गजब था प्यार।
लङाई झगङे से बङता था हमारा प्यार।
मस्ती भरे दिन थे वो शैतानी भरी रात।
आज भी मिलकर करते हम वो पुरानी बात।
दिन भर खैलना, स्कूल से भागना, कैरी चोरी करना, सहद का मजा।
आज भी वो याद है पकङे जाने पर एक अनौखा बहाना।
अजब-गजब नये कारनामें करते, अजब-गजब किस्से रचते।
हर गली में एक दोस्त होता हर दिन कुछ नया होता।
अजब हर बरसात थी अजब थी गर्मी।
रोज कुएँ पर नहाना और गर्मी में मौज मस्ती।
बचपन हमेशा खास, बचपन अब भी याद है।
याद है सिसकियाँ मुझे याद है डरावनी रात।
याद है हर पल जो था मेरे अपनों के साथ।
भुलना चाहूँ उन्हें तभी तो करुँ नये काम।
आज मुझे याद है मेरे तोते का साथ।
आज भी मुझे याद आते है बचपन के वो दिन।।
-कवितारानी।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें