खत थारे नाम / khat thare naam
खत थारे नाम
एक खत लिखुँ थारे नाम, यो पत्र लिखुँ थारे नाम।
बतलाने को दशा म्हारी, थेई समझणे को बात म्हारी।
जग बणायो थाने छोको घणों, मन बणायो थाने पर धोखो घणों।
आ जावे मण हर जगवासिणी प, पर इमें मण क्यों थ रोको कोणी।
मणक बणाया पर विश्वास कोणी, लक्ष्मी बणाई पर एक की कोणी।
दिमाग बनायों पर चलाबो सिखायो कोणी, जिण चलायो उ जमीं प ही रयो कोणी।
प्रीत बनायी शहर बणाया-बणाया घर बार,
पर जाँ अपणों कोणी खँई भी कोणी।
जाँ अपणो ह वाँ मिलबा देव कोणी।
मिलबा देवे तो शक रुके कोणी।
दोस्त बणाया प दोस्ती कोणी, बात फेली की अब री भी कोणी।
गजब थारी ह मोर माया प्रभु सच्चो दोस्त भी साथ कोणी।
जां ह माया प्रभु सब कर इज्जत उकी या तो मंदर भी साफ तभी जब या ह साथ।
या कोणी तो थार प भी विश्वास कि कोणी।
गरीबी की तु सुण ल, पापियाँ की भी सुण ल म्हारी भी सुण जा।
और हर दुखी की सुण ल कृपा ह सब प थारी।
जय नर नारी, कृपा हो जाँप थारी।
लिख रह्यो ह बण दुखदारी कृपा वार जो प्रभु थारी।
फेर मुँ कहुवां, जय श्री कृष्ण, जय मुरारी।।
-कवितारानी।
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