बढ़े चलो / bade chalo
बढ़े चलो
गीत मेरे मन का आज जुबां पर आया।
बढ़ाने कदम ख्वाब नये लाया है, ख्वाब नये लाया है।
बढ़े चलो, बढ़े चलो डगर सुहानी करें चलो।
बढ़े चलो, बढ़े चलो, काम मन के किये चलो।
पत्थर आये जो राह मे तो हॅसकर उसे हटायेंगे।
कांटो वाली राहों पर संभलकर चलते जायेंगे।
हर मुश्किलों में होंसले अपने बुलंद करते जायेंगे।
जो रुकावटें हो खङी तो हिम्मत से डटकर हटायेंगे।
कर मन को राजी तन को साथी हम बढ़ते जायेंगे।
हम बढ़ते जायेंगे। हम बढ़ते जायेंगे।
बढ़े चलो, बढ़े चलो सपने पुरे करते चलो।
बढ़े चलो, बढ़े चलो सबको खुश करते चलो।
आज आजमाये तो वक्त तो हम नहीं घबरायेंगे।
वक्त की रफ्तार से कदम हम मिलायेंगे।
जो हो जाये तो देर तो हुंकार ना हम लगायेंगे।
कर मन शाँत और तन शाँत फिर कदम उठायेंगे।
रुकना नहीं थकना नहीं बस बढ़ना है बढ़ना है यही दोहरायेंगे।
बढे चलो, बढ़े चलो वक्त की रफ्तार ले चलो।
बढ़े चलो, बढ़े चलो समसामयिक होकर चलो।
कर माटी को नमन, कर मां नमन , कर हौंसले बुलंद, बढ़े चलो।
कर तन साफ, करमन साथ, चरित्र साफ लेकर चलो, बढ़े चलो।
लेकर धर्म, संस्कृति, परंपरायें ईश्वर की राह चलो।
लेकर देश का विकास और विकास खुद पर तुम चले चलो।
बढ़े चलो, बढ़े चलो।।
-कवितारानी।
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