माँ आपकी याद आती है / Maa Apki yaad aati hai

 माँ आपकी याद आती है


सपने देखना ना जानता था जो दिखाए आपने।

परायों और अपनों में भेद ना था जो जनाया आपने।

खुद खङे होना ना जानता था पर दोङवाया आपने।

अब क्यों रुसवा से दिख रहे हो।

अब क्यों दूर लग रहे हो।

जब पास आता हूँ आपके तो दूर जाते दिखते हो।

जब दूर से देखता हूँ तो पास बुलाते दिखते हो।

लोग जो सुनते हैं जो कहते हैं और पढ़ते है जीवन के बारे में।

सब अनुभव करवाया आपने।

दर्द, तङप, जोश, कर्म, रोग, आलस्य, लोभ, मद, मोह, डर,

प्यार, झिझक, शर्म, मर्म, दुख, उल्लास, आनन्द सब बताया आपने।

जीवन एक हिस्सा वानप्रस्थ हो जो शिक्षा संग इन अनुभव में बितवाया आपने।

पर अब समय कम है, अब ग्रहस्थ आ रहा है, पर आधार भी नहीं बताया आपने।

अब क्या होगा मेरा, अब कौन होगा मेरा।

अब भी वैसी ही तङप से अनुभव से भरी होगी जिन्दगी।

या जो सपने संजो लिए हैं वो पूरे करने को बढ़ पाऊँगा।

कुछ राह बता, अब भी जरुरत है तेरी कुछ कर्म बता।

कहीं भटक ना जाऊँ इस मृत्युलोक में तेरा द्वार बता।

प्रभु तेरा द्वार बता।।


-कवितारानी।

टिप्पणियाँ

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