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मोर संग / mor sang

मोर संग एक शाम गुलाबी। एक नैन शराबी। कजरारे काले हैं। पंखो पर शरारे हैं। मोरध्वज सुंदर। शाम रंग अति सुंदर। मधुर मय के प्याले ये। नैन रसीले प्यारे हैं।। छत पर शीतल पवन। एक ताङ, नीम और शहर। एक अमरुद फलित है। शाम मधुर है। मेर श्रृंगार विकट बैठा। देखता कभी, कभी सजता। सखा शाम आज मयुर। शाम गुलाबी है मधुर। शमा खफा मैं खुश। बैरी बैठी मैं खुश। अलग रंग अलग ढंग। शाम गुलाबी मधुर रंग। कप का प्याला। करता मतवाला। अब बहाना। मैं मतवाला। उङ चला मोर संग। उसके रंग।। -कवितारानी।