हे प्रभु / hey prabhu

हे प्रभु।


है प्रभु, सहते-सहते कहीं गम में मन ना जाऊँ कहीं।

दूर होकर तुझसे नास्तिक ना बन जाऊँ कहीं।

देखे हैं जो ख्वाब उन्हें इन मस्त राहों में भुला ना पाऊँ कहीं।

जो सजाएँ हैं अरमान भुल ना जाऊँ कहीं।

हो प्रभु, मुझे वर दो।

मुझे शक्ति दो इतनी की डटकर सामना करूँ हर कहीं।

कठिन हो राह कितनी ही, चाहे हो राह कंटिली कितनी ही।

रुकुं ना झुकु ना, पालुं दृढ़ होकर मंजिल यहीं।

खोकर आपा में रुक ना जाऊं कहीं।

हे प्रभु, निवेदन है आपसे की कृपा रखना।

झुके मेरा सिर तो हाथ आपका रखना।

भुले से हो गलती ते भले सजा देना आप।

देखे हैं रखी जिंदगी मैंने जो दिखाई आपने।

सहते-सहते गमों को, मैंने बिताया लम्हों को।

कोशा है कई बार मैंने आपको पर आया भी आपके द्वार।

इतनी सी है विनती अबके लेना आप संभाल।

मेहनत करुँगा पुरी जी जान लगाकर।

बस साथ आप रहना मेरे हर दम।

करुँ पुजा-अर्चना हमेशा आपकी।

दिखाये जो ख्वाब अपनों को पुरा करुँ उनकों।

काबिल इतना मुझे बना देना, विनती है फिर से नादान की।

है प्रभु, इस बार ओर सम्भाल लेना मेरी आप।।


-कवितारानी।

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