ख्वाब बहते / khvab bahate
ख्वाब बहते
उमङ-घुमङ जब ख्वाब बहते,
पहर-पहल कर जब दिन ढलते,
लहर-ठहर जब सपने उठते,
उलङ-उलङ कर जब दिन मिलते,
तब होती हर शाम सुहानी, दिन मस्ताना रात दिवानी।
सुबह के फेरे दिल को घेरे,
मन में होते दिवानों के ढेरे,
चलते रहते नयन नसुरी,
मन को नहीं तब जरा सबुरी।
मचल-मचल कर दिल हिलोरे लेता,
तङप-तङप कर साँस निकलती,
करवट-करवट नींद उङती,
सरपट-सरपट दिन ढलता,
बरस-अरस सी रात लगती।
जब होता किसी की नजरों का इंतजार,
जब होता बिन समझे किसी से हाल बेहाल,
जब उङ जाती रातों की नींद और मन जाती मन की भुख,
जब देखने को रहता किसी को दिल बेकरार,
ऐसे में ही कहते है कि हो जाता है प्यार।
साजन के साथ सपने होते,
अपने भी तब पराये होते,
होता अकेले रहने का मन,
दिन रेन ख्वाबों के पल होते,
दोस्त भी तब अनजान होते,
साजन के साथ हम मस्त होते।
होते ख्वाब अनौखे, अनौखी होती सपनों कि दुनिया।
दिल ही संसार होता और प्रिय ही रब होता,
होता है उसी पर ऐतबार, होता सिर्फ उसी से प्यार,
जब नयनृ-नयन करते बात, जब दिल-दिल करते मैल मिलाप।
जब मिलने को तङप सी उठे जब कहीं भी जी ना लगे।
जब अपने अनजाने लगे, तब होता है हाल,
तब हो जाता है प्यार।।
-कवितारानी।
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