मैं शराबी हूँ / main sharabi hun

मैं शराबी हूँ


आज मैं शराबी हूँ, 

क्योंकि मैं खुद से दुखी हूँ।

पी थी कभी मौज में, 

पी थी कभी मयखाने में।

पी थी मैंने कभी अपने छोटे-मोटे गम भुलाने में।

आज पी है मन बहलाने में,

तभी तो मैं शराबी हूँ।

आज मैं शराबी हूँ।

पहले कभी यह मेरा शौर्य दिखाती थी।

कभी मुझे गम से दुर ले जाती थी।

पहले मौज कराती थी।

आज रुलाती है,

क्योंकि आज मैं शराबी हूँ।

पहले मैं इसको पीता था,

आज ये मुझे पीती है।

सादा में मुझे रहने नहीं देती।

पहले ये मेरे लिए बेकरार थी,

आज मैं इसके लिए बैकरार हूँ।

आज मैं शराबी हूँ।

पहले ये शान थी,

रुतबा थी, जवानी थी, साहस थी।

आज ये गरीबी है,

दुख है, दर्द है, रोग है, अकेलापन है।

फिर कोई नहीं साथ पर ये मेरे साथ है,

आज मैं शराबी हूँ।

छोङने ये देती नहीं,

छोङता मैं इसे नहीं,

कहाँ से आती है पता नहीं।

पर जब आती है मदहोंश कर जाती है।

ये जाने क्या है,

ये ही मेरा सब है ना घर है ना परिवार, ना मित्र।

ना रिश्तेदार बस यही मेरी जान है,

क्योंकि, आज मैं शराबी हूँ।

हाँ, आज मैं शराबी हूँ।।


-कवितारानी।

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