मतलब की यारी / matalab ki yaari

मतलब की यारी


दोस्ती होती बङी अजीब है, मतलब की ये चीज है।

बिना मतलब पुछेगा नहीं कोई तुम्हें, यही इसकी तस्वीर है।

कहने को होती है वफा और कहने को होते वादे सारे।

दिखावे पर बनते है दोस्त भावनाओं से रहते दूर सारे।

दुख में साथ नहीं होता कोई और सुख में भीङ पङी है भारी।

ये दोस्ती दिखावे की चीज साली।

हर दिन कोई दिल तोङ देता है, प्रिय दोस्त भी साथ छोङ देता है।

जब जरुरत होती उसकी सबसे ज्यादा तो अपनी पङती है सबको।

दगा देगा इसकी फितरत में होता है और आए दिन दिल टुटता है।

कभी-कभी तो सच्चाई का साथ भी नहीं देते सच्चे दोस्त।

फिर किस बात की ये दोस्ती यारी।

ये दोस्ती मतलब की चीज है साली।

दो लङके हो तो कम दर्द होता है पर लङके लङकी में अधिक होती है।

यारी, जब पता चलता है दगा का तो लुट जाती है दुनिया सारी।

फिर लुट जाता है चैन, करार और भुख, प्यार भी मिट जाती सारी।

ऊपर से दुसरा दोस्त सहलाने के बजाए उङाता है खिल्ली हमारी।

पर जब उस पर आती है ये बीमारी तब समझता है ये खिलाङी,

दोस्ती मतलब की चीज है साली।

माना हर जगह काम आते दोस्त, पर हम से भी वो काम लेते है दोस्त।

बिना दिखावे कोई पास नहीं आता गिरगिट-गिरगिट को ही है रास आता।

अकेले रहना दुनिया में आसान नहीं, पर साल हर जगह इनको लेकर चल सकते नहीं।

इसलिए कर लेते है साझा हर जगह और कह देते है की अपनी दोस्ती है सबसे प्यारी।

पर फिर भी हर जगह कहना पङता है अपनी-अपनी दोस्ती।

अपनी-अपनी यारी फिर ये दुनिया हमारी।।


-कवितारानी।

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