रीत / reet

 रीत


हर रीत रिश्ते बताती है,

हर रीत हकीकत दर्शाती है।

मैलजोल बढ़ाती है, दोस्त बनाती है।

हर रीत रास्ते दर्शाती है।

शादियाँ भी होती है रीत अनौखी।

सच्चाई को ये दर्शाती है, सही रिश्तों की पहचान कराती है।

जो काम में काम आये वो ही सच्चा हीतैशी है।

जो रीत में प्रित रखे वही सच्चा करीबी है।

अब तब दुसरों की शादियों में घुमें थे,

अब घर की ये धुपें हैं।

अब पता चला की सच्चा दोस्त बिन कहे आगे होता है।

अब पता चला नजदीकी भी दिखावी होता है।

यह रीत बङी मुश्किल है।

अब पता चला की सब को खुश रखना बङा कठिन है।

इसी में पता चलता है कि कौन आगे काम आयेगा।

इसी में पोंगे पण्डित का पता चलता है।

पर उलझन अब भी जारी है कि क्या करें गद्दारों का।

चलता रहता समय का चक्र कब तक नाराज रहेगें।

कब तक पुरानी यादों को भुलाने की कोशिश में जीते जायेंगे।

यह रीत बङी कठिन है पर सच्चाई की तस्वीर होती है।

हर रीत कुछ बयाँ करती है।

हर रीत सच्चाई बयाँ करती है।।


-कवितारानी।


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