मैंने नया जहान देखा / Maine naya jahan dekha

मैंने नया जहान देखा


मैंने इस जहान मैं आज एक नया जहाँ देखा।

दिन में रात और रात को नये राग में देखा।

गहराई थी गहरी और सुहावनी थी घङियाँ।

एक-एक पल कट रहा था मानों हो एक-एक जीवन।

मैंने उस मंद मुस्कान के साथ एक खुबसुरत जहाँ देखा।

जिस पल देखा लगा की एक सुनहरा इतिहास लिख बैठा।

तेरी आँखों की सच्चाई मैं जहाँ सारा भुला बैठा।

वो मदहोश गहराई देखी, वो अद्भुत अहसास देखा।

देखा वो पल जो शायद किसी ने परिलोक में देखा।

एक-एक पल का क्षण लाखों पुण्यों का फल लगा।

लगा जैसे इनसे ही है जहाँ और इनसे ही अंत देखा।

तेरी आँखों में पुरा समय चक्र देखा।

मैंने तेरी आँखों में जो खुबसुरत जहाँ देखा।

सजाए रखा हो उसे अब भी, और फिर चाहता हुँ देखना।

मैंने तेरी आँखों में नक्षत्रों को मिलते देखा।

हाँ मैंने वो खुबसुरत जहाँ देखा।।


-कवितारानी।

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